11) प्रभु भोज
पवित्र भोज का अर्थ और उसकी विधि
प्रभु भोज यीशु द्वारा स्थापित एक पवित्र स्मारक है। इस पाठ में हम इस विधि का गहरा अर्थ और उसमें कैसे भाग लेना चाहिए, इसका अध्ययन करेंगे।
भोज की स्थापना
यीशु ने प्रभु भोज कब स्थापित किया?
यीशु ने कहा कि रोटी किसका प्रतीक है?
दाखरस (अंगूर का रस) किसका प्रतीक है?
“प्रभु भोज की विधि मसीह की मृत्यु के परिणामस्वरूप हुई महान छुटकारे की स्मृति के लिए दी गई थी।” — स्थानीय अनुवाद/पैराफ्रेज़; स्रोत: Ellen G. White, O Desejado de Todas as Nações, DTN 462.3
भोज का उद्देश्य
हमें प्रभु भोज में भाग क्यों लेना चाहिए?
भोज में भाग लेकर हम क्या घोषणा करते हैं?
भोज के लिए तैयारी
हमें प्रभु भोज के लिए कैसे तैयारी करनी चाहिए?
अयोग्य रीति से भाग लेने का क्या खतरा है?
पाँव धोना
भोज स्थापित करने से पहले यीशु ने क्या किया?
यीशु ने शिष्यों के पाँव क्यों धोए?
“हमारे प्रभु के कार्य के द्वारा यह नम्र करने वाली विधि एक पवित्र ठहराई गई विधि बन गई।” — स्थानीय अनुवाद/पैराफ्रेज़; स्रोत: Ellen G. White, O Desejado de Todas as Nações, DTN 460.2
यदि हम क्या करें तो धन्य होंगे?
और अब?
प्रभु भोज एक पवित्र अवसर है:
- यह एक स्मारक है: हम यीशु की मृत्यु को याद करते हैं
- तैयारी मांगता है: हमें अपने हृदय की जाँच करनी चाहिए
- पाँव धोना शामिल है: नम्रता और सेवा का प्रतीक
- भविष्य की ओर संकेत करता है: जब तक यीशु फिर आए
मेरा निर्णय
मैं समझता/समझती हूँ कि प्रभु भोज यीशु की मृत्यु का मेरे लिए एक पवित्र स्मारक है। मैं इस विधि में तैयार हृदय के साथ भाग लेना चाहता/चाहती हूँ, मसीह के बलिदान को मानते हुए और उसके पुनरागमन में अपना विश्वास प्रकट करते हुए।