3) परमेश्वर पुत्र
यीशु मसीह की दिव्यता, ईश्वरीय पुत्रत्व और हमारा उद्धार
कुछ संदर्भों में “परमेश्वर का पुत्र” गलत शारीरिक अर्थ में समझा जा सकता है। बाइबल यह नहीं सिखाती कि परमेश्वर की पत्नी है या कोई जैविक जन्म हुआ। पुत्रत्व एक अनन्त, ईश्वरीय संबंध है: यीशु मसीह परमेश्वर पुत्र है, अनन्त वचन, जिसने हमारे उद्धार के लिए सच्चा मनुष्यत्व धारण किया।
वचन परमेश्वर था
यूहन्ना 1:1 वचन के बारे में क्या कहता है?
यूहन्ना दो बातें साथ रखता है: वचन “परमेश्वर के साथ” था, और वचन “परमेश्वर” था। पुत्र पिता से अलग है, पर दिव्य प्रकृति में सहभागी है।
यूहन्ना 1:14 के अनुसार वचन क्या बना?
देहधारण किसी देवता का अस्थायी अवतार नहीं है। बाइबल सिखाती है कि अनन्त पुत्र ने हमारा सच्चा मनुष्यत्व लिया ताकि वह हमें बचाए।
यीशु परमेश्वर है
पुनरुत्थान के बाद थोमा ने यीशु को क्या कहा?
यीशु ने थोमा की आराधना को रोका नहीं। सच्चे सृजित प्राणी आराधना स्वीकार नहीं करते, पर यीशु स्वीकार करता है क्योंकि वह प्रभु और परमेश्वर है।
कुलुस्सियों 2:9 मसीह के बारे में क्या कहता है?
बाइबल यीशु को केवल महान मनुष्य नहीं बताती। वह सच्चा मनुष्य है, पर केवल मनुष्य नहीं। उसमें ईश्वरत्व की परिपूर्णता है।
“मसीह में जीवन मौलिक, उधार लिया हुआ नहीं, और किसी से प्राप्त किया हुआ नहीं है।” — स्थानीय अनुवाद/पैराफ्रेज़; स्रोत: Ellen G. White, The Desire of Ages, p. 530, par. 3.
अनन्त पुत्र
मीका 5:2 मसीह की उत्पत्ति के बारे में क्या कहता है?
बेतलेहेम उसका मनुष्य रूप में जन्मस्थान था, उसके अस्तित्व की शुरुआत नहीं। पुत्र अनन्त से पिता के साथ था।
अब्राहम से पहले यीशु ने अपने बारे में क्या कहा?
यीशु ने अपने अनन्त अस्तित्व और दिव्य अधिकार को प्रकट किया। इसी कारण उसके विरोधियों ने उसके शब्दों की गंभीरता समझी।
पुत्र और पिता
यीशु के शब्द 'मैं और पिता एक हैं' का क्या अर्थ है?
पिता और पुत्र अलग हैं, पर वे अलग देवता नहीं। वे दिव्य प्रकृति, महिमा और उद्देश्य में एक हैं।
“मसीह, वचन, परमेश्वर का एकलौता पुत्र, अनन्त पिता के साथ एक था — प्रकृति, चरित्र और उद्देश्य में एक।” — स्थानीय अनुवाद/पैराफ्रेज़; स्रोत: Ellen G. White, Patriarchs and Prophets, p. 34, par. 1.
उद्धार के लिए यह क्यों आवश्यक है?
उद्धारकर्ता को परमेश्वर और मनुष्य दोनों क्यों होना चाहिए?
यदि यीशु केवल मनुष्य होता, तो वह संसार को नहीं बचा सकता था। यदि वह सचमुच मनुष्य न बना होता, तो वह हमारे स्थान पर मर नहीं सकता था। वह परमेश्वर-मनुष्य है: पूर्ण उद्धारकर्ता।
क्या यीशु ने आराधना स्वीकार की?
अब क्या?
परमेश्वर पुत्र में विश्वास हमें यह सिखाता है:
- उद्धार पर भरोसा: उद्धारकर्ता केवल मनुष्य नहीं, परमेश्वर है जो हमारे पास आया।
- मसीह की आराधना: यीशु आराधना के योग्य है।
- परमेश्वर के प्रेम को समझना: पुत्र स्वयं हमारे उद्धार के लिए आया।
- पुत्रत्व की शारीरिक गलत समझ को अस्वीकार करना: मसीह का पुत्रत्व अनन्त और दिव्य है।
मेरा निर्णय
मैं मानता हूँ कि यीशु मसीह परमेश्वर पुत्र है, अनन्त वचन जिसने मेरे उद्धार के लिए मनुष्यत्व धारण किया। मैं उसे प्रभु और उद्धारकर्ता मानता हूँ और पिता और पवित्र आत्मा के साथ उसकी आराधना करता हूँ।